रोचक जानकारी: 32 डिग्रियाँ और 9 भाषाओँ के ज्ञाता थे बाबा साहेब

रोचक तत्थ: 32 डिग्रियाँ और 9 भाषाओँ के ज्ञाता थे बाबा साहेब

नई दिल्ली: भीमराव अंबेडकर जयंती, देश भर में आज बाबा साहेब का जन्मदिन बहुत ही धूमधाम से मनाया जा रहा है. अंबेडकर साहेब का जन्म आज ही के दिन 14 अप्रेल 1891 को हुआ था और 6 दिसंबर 1956 को उन्होंने अंतिम सांस ली थी. संविधान निर्माता और भारत रत्न डॉक्टर अंबेडकर साहेब समाज सुधारक, राजनीतिज्ञ और बहुत अच्छे अर्थशास्त्री भी थे. बाबा साहेब भारतीय समाज के ऐसे नायक थे, जिन्होंने ताउम्र गरीब और वंचित वर्गों के लिए आवाज उठाई. चलिए जानते है बाबा साहेब से जुड़ी कुछ ऐसी रोचक बातें जिन्हें शायद सभी नहींजानते होंगे….

 

समाज के हर वर्ग की आवाज थे डॉ. अंबेडकर-

 

बाबा साहेब केवल दलितों के लिए ही नहीं बल्कि समाज के सभी शोषित-वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए आवाज उठाते थे. अंबेडकर जी ने दलित बौद्ध आंदोलन को बहुत प्रेरित किया और दलितों के खिलाफ सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया. लेकिन यह कहना बिल्कुल ही गलत है कि अंबेडकर सिर्फ दलितों के थे. समाज के हित के लिए उन्होंने हर उस वंचित वर्ग के अधिकारों की बात की, जिसे समाज में दबाया या कुचला गया. इतना ही नहीं, उन्होंने श्रमिकों और महिलाओं के अधिकारों का भी पुरजोर समर्थन किया. इसलिए आज देश में भीमराव अंबेडकर जयंती मनाई जाती है और उन्हें याद किया जाता है.

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भारतीय समाज में उस समय छुआछूत नाम की बहुत बड़ी बीमारी फैली हुई थी. इस बीमारी को समाप्त करने के लिए डॉ. अंबेडकर ने एक व्यापक आंदोलन चलाया. उन्होंने अछूतों को भी हिंदू मंदिरों में प्रवेश करने का अधिकार दिलाने के लिए लंबे समय तक काफी संघर्ष किया.

 

संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल, 1891 को मध्य प्रदेश के महू शहर में हुआ था. वे रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई की 14वीं संतान थे. बाबा साहेब के पिता ब्रिटिश भारतीय सेना में काम करते थे. अंबेडकर जी महार जाति से ताल्लुक रखते थे, जिसे उस दौर में हिंदू धर्म में अछूत माना जाता था. उनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण बाबा साहेब का पालन-पोषण बहुत मुश्किल से हुआ.

 

  1. समाज में अपनी जाति के कारण उन्हें सामाजिक प्रतिरोध का भी सामना करना पड़ा. (भीमराव अंबेडकर जयंती विशेष)
  2. छात्र भीमराव को स्कूली पढ़ाई में सक्षम होने के बावजूद छूआछूत के कारण कई प्रकार की मुसीबतों से गुजरना पड़ा.
  3. अपने स्कूल के सबसे मेधावी छात्रों में गिने जाने के बावजूद उन्हें पानी का गिलास छूने का अधिकार नहीं था.
  4. बाबा साहेब ने हिंदू धर्म की कुरीतियों को समाप्त करने का जिंदगी भर प्रयास किया आर्थिक मुश्किलों के साथ ही बाबा साहेब को हिंदू धर्म की कुरीतियों का भी सामना करना पड़ा.
  5. वे इन सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए हमेशा प्रयास करते रहे, लेकिन तमाम प्रयासों के बाद जब उन्हें लगा कि वे हिंदू धर्म की कुरीतियों को नहीं मिटा पाएंगे, तो उन्होंने 14 अक्टूबर, 1956 में अपने लाखों समर्थकों साथ बौद्ध धर्म अपना लिया.
  6. डॉ. भीमराव अंबेडकर की पहली शादी 9 साल की उम्र में ही कर दी गई थी, उनका पत्नी का नाम रमाबाई था. जब रमाबाई की मौत हो गिया तो उन्होंने सविता से शादी कर ली थी जो वे ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखती थीं. सविता ने भी अपने पति के साथ बौद्ध धर्म अपना लिया था. अंबेडकर साहेब की दूसरी पत्नी सविता का निधन वर्ष 2003 में हुआ था.
  7. डॉ. अंबेडकर की गिनती दुनिया के सबसे मेधावी व्यक्तियों में होती थी.
  8. सबसे अहम् बात वे 9 भाषाओं के ज्ञाता थे और उन्हें देश-विदेश के कई विश्वविद्यालयों से पीएचडी की कई मानद उपाधियां मिली थीं. इतना ही नहीं, इनके पास कुल 32 डिग्रियां थीं.
  9. इन्हीं खूबियों के कारण अंबेडकर को प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भारत का पहला कानून मंत्री बनाया था.
  10. जब 15 अगस्त, 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाली नई सरकार अस्तित्व मे आई, तो उसने अंबेडकर को देश का पहले कानून मंत्री के रूप में सेवा करने के लिए आमंत्रित किया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया था.
  11. आजाद भारत के पहले संविधान के निर्माण के लिए उन्हें 29 अगस्त, 1947 को संविधान की प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाया गया. लगभग दो वर्ष, 11 माह, 18 दिन के बाद देश का संविधान बनकर तैयार हुआ.
  12. देश में 26 नवंबर, 1949 को इसे अपनाया गया और 26 जनवरी, 1950 को इसे लागू कर दिया गया.
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बाबा साहेब ने देश में ही नहीं, विदेशों में भी भारत को एक नई पहचान दिलाई.  समाज में व्याप्त कुरीतियों और असमानता को जड़ से ख़त्म करने के लिए उन्होंने सतत संघर्ष किया. आज भीमराव अंबेडकर जयंती पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जो अधिकार हमें मिले है वे उनकी ही देन है… जय भीम !

 

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