FREAKY FUNTOOSH - FLAVORED ENTERTAINMENT: Mum Bhai Review - तनाव, रहस्य और रोमांच से भरपूर

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Mum Bhai Review - तनाव, रहस्य और रोमांच से भरपूर

डिजिटल फ़िल्मी दुनिया में सबसे तगड़ा मुकाबला अगर किसी कथानक को लेकर है तो वह है अपराध आधारित कहानियां। जी हाँ दोस्तों,  ऐसी ही एक कोशिश की है जानी मानी फिल्म प्रोडूसर एकता कपूर ने, उन्होंने अपनी टीम के साथ एक नया अपराध शो ‘मुम्भाई  बनाया है। वेब सीरीज ‘मुम्भाई’ एकता कपूर और उनके ख़ासमख़ास निर्देशक अपूर्व लखिया के दिमाग की खुराफ़ात है। 


हुसैन जैदी की ही तरह अपूर्व लखिया को भी ऐसा लगता है कि मायानगरी मुंबई के अंडरवर्ल्ड को उनसे बेहतर और कोई नहीं समझता। लेकिन यहाँ समझने वाली बात यह है कि अपराध की कहानियों को परदे पर कहने का तरीका लगातार बदल रहा है। इसमें कोई दोराय नहीं कि वेब सीरीज ‘मुम्भाई’ की  कहानी में दम है, इसके मुख्य कलाकारों ने काम भी बढ़िया किया है, दूसरी तरफ अगर इसके डायरेक्शन की बात करे तो बहुत ही लचर है और इसकी सेटिंग भी बिगड़ी-बिगड़ी सी लगती है। और इस फिल्म में एक अपराध सीरीज का तनाव, रहस्य, रोमांच यहां नहीं पनप पाता। वहीँ सीरीज की सबसे बड़ी कमजोर कड़ी है इसका एक्शन डिपार्टमेंट। वेब सीरीज ‘मुम्भाई’ की कहानी दो ढाई दशकों के बीच तैरती हुई नजर आती है। पिछली सदी के नौवें दशक की शुरूआत से लेकर नई सदी के शुरू के सालों तक फैली इस कहानी का एक सिरा मैंगलोर से जुड़ता है और दूसरा मुंबई से। मैंगलोर से आया भाई यहां मुंबई में "मुम्भाई" बन जाता है। 

मां के आंचल पर हाथ डालने वाले ‘गुरुजी’ को पहला राशन पानी देने वाला भास्कर मैंगलोर से मुंबई आता है तो बड़े शेट्टी से मिलता है। क्लास ऑफ 83 का हिस्सा बनने से पहले वो तमाम दूसरे काम भी करता है लेकिन पुलिस में एक बार चमक बिखेरने के बाद एटीएस का कुंबले भी वही बनता है। वेब सीरीज ‘मुम्भाई’ जितने हिस्सों में बंटी है, उसमें बीच बीच में शरद केलकर की आवाज कहानी को मजबूत बनाती चलती है। लेकिन, किसी अपराध कथा में वॉयस ओवर करके अगर बताना पड़े कि कहानी किधर जा रही है तो फिर इससे तो पटकथा की कमजोरी ही जाहिर होती है। 

परदे पर जो करके नहीं दिखाया जा सकता, उसे पटकथा में रखने की जरूरत ही नहीं है। अपूर्व लखिया ने अपने साथ लेखकों की जो टीम खड़ी की है, वह दाएं बाएं भटकती रहती है। फिल्म की ये टीम माहौल जरूर बढ़िया सेटअप करती है, लेकिन एक कड़ी से दूसरी कड़ी तक जाने के लिए जिस तरह के सरल प्रवाह की जरूरत ऐसी कहानियों में होती है, उसे ये टीम पकड़ नहीं पाई। अपराधियों और पुलिस के बीच की भागदौड़ को परदे पर उसके पूरे तनाव के साथ न दिखा पाना सीरीज की दूसरी कमजोर कड़ी है। ऐसी सीरीज रीयल लोकेशन पर जितनी ज्यादा शूट की जाए, उतनी ही दमदार रहती है।

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लेकिन, यहां लगता है कि जैसे राइटर ने बस सीरीज छाप दी हो। हीरो या हीरोइन के भाइयों के किरदार करते रहे अंगद बेदी वेब सीरीज ‘मुम्भाई’ की असल चमक हैं। भास्कर के रोल में उन्होंने कमाल का अभिनय किया है। फिल्म इंडस्ट्री वालों को इसे नोटिस करना चाहिए और एक अच्छे कलाकार को साइड रोल से निकालकर मेन स्ट्रीम वाले रोल देने चाहिए। वेब सीरीज में सिकंदर खेर ने भी काफी मेहनत की है और उनकी ये मेहनत परदे पर नजर भी आती है। दूसरी तरफ समीर धर्माधिकारी ने कहानी को कुछ कद तक सपोर्ट किया है। संदीपा धर के अभिनय की धार कमजोर दिखाई देती है। फिलहाल उन्हें खुद पर और काम करने की जरूरत है। वेब सीरीज ‘मुम्भाई’ इस सीजन की एक कमजोर वेब सीरीज है, जो नेटफ्लिक्स पर आ चुकी है.

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