Wednesday, 28 September 2016

नवरात्रि में विधि-विधान से पूजन करने के नियम



पुराणों में पूजन की पांच विधियाँ बताई गई है, पहला सफाई(अभिगमन) दूसरा उपादान(गंध पुष्प आदि पूजन सामग्री का संग्रह) तीसरा योग(अपने इष्ट देव की आत्मरूप से भावना करना) चौथा सवाध्याय(मन्त्र जप, सूक्त स्त्रोत, नाम गुण आदि का कीर्तन करना) पांचवा इज्या(इसमें षोडषोपचार अर्थात सोलह प्रकार के उपचार सम्मिलित है.

यह षोडषोपचार इस प्रकार है:

आसन
स्वागत
पाद
अर्ध्य
कलश
आचमन
मधुपर्क
स्नान
वस्त्र
आभूषण
सुगन्धित द्रव्य
पुष्प
धूप
दीप
नैवेद
वंदना.  
नवरात्रि के नो दिनों में आप जितनी भक्तिभाव से माता दुर्गा की पूजा करेंगे उतना ही माता रानी आपको सफल-सरल और सुशिल बनाएगी. इसलिए इस नवरात्रि में पूजा को बड़े ही विधि-विधान के साथ करना.

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