Friday, 30 September 2016

अमिताभ : इसको लगा डाला मतलब फॅमिली जिंगालाला

 
amitabh bachchan in tata sky tvc ad

बात पते की, यदि आप एंग्रीमेन मतलब बिग बी मने अमित जी के गजब के फेन है तो यह आर्टिकल आप पर कुर्बान है चूँकि रिश्ते में तो हम तुम्हारे....नाम है .....को दिलो जान से चाहते है. हमारे कुली नंबर वन फिल्म जगत में आए दिन कुछ न कुछ नया करते रहते है, उनके कर्मकांड से उनकी उम्र का पता ही नहीं चलता है.

ऐसा लगता है जैसे बच्चन साहब फिर से बचपने में चले गए है और एक नई ज़िन्दगी की शुरुआत कर रहे है, वे फिर जवान होंगे...फिर बूढ़े होंगे...और फिर दिल तो बच्चा है जी. अमितजी कभी कौन बनेगा करोड़पति के होस्ट, तो कभी नवरत्न तेल...ठंडा-ठंडा कूल-कूल में और कभी दिवार,जंजीर,अमर अकबर अन्थोनी,डॉन,अग्निपथ,ब्लैक,पा,पिकू जैसी विचित्र और चुनौतीपूर्ण फिल्मे करने के बाद आज बॉलीवुड में ही नहीं पूरी दुनिया में वे एक अलग पहचान के साथ जाने जाते है. 

जब अमिताभ बच्चन साहब बीमार होने पर हॉस्पिटल में भर्ती हुए तो पूरा देश उनके अच्छे होने की प्रार्थना करने लागा और वे शीघ्र ठीक हो गए.एंग्रीमेन का फ़िल्मी सफ़र बहुत ही प्रेरणादायक और दिलचस्प है, उनकी एक्टिंग भी अपने आप में किसी हकीकत से कम नहीं है. 

Source- mj786

हाल ही में अपने बच्चन साहब ने एक विज्ञापन किया है जो Tata sky company का है, जिसका प्रिय डायलॉग है टाटा स्काई लगा डाला तो..लाइफ जिंगा लाला...और इसी कंपनी का विज्ञापन हमारे शहंशाह ने किया है...आप भी देखे और शेयर करे और लाइफ को जिंगा लाला बनाए !

सम्बंधित आर्टिकल्स- 

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ऐसा लगता है जैसे बच्चन साहब फिर से बचपने में चले गए है और एक नई ज़िन्दगी की शुरुआत कर रहे है, वे फिर जवान होंगे...फिर बूढ़े होंगे...और फिर दिल तो बच्चा है जी. अमितजी कभी कौन बनेगा करोड़पति के होस्ट, तो कभी नवरत्न तेल...ठंडा-ठंडा कूल-कूल में और कभी दिवार,जंजीर,अमर अकबर अन्थोनी,डॉन,अग्निपथ,ब्लैक,पा,पिकू जैसी विचित्र और चुनौतीपूर्ण फिल्मे करने के बाद आज बॉलीवुड में ही नहीं पूरी दुनिया में वे एक अलग पहचान के साथ जाने जाते है. 

जब अमिताभ बच्चन साहब बीमार होने पर हॉस्पिटल में भर्ती हुए तो पूरा देश उनके अच्छे होने की प्रार्थना करने लागा और वे शीघ्र ठीक हो गए.एंग्रीमेन का फ़िल्मी सफ़र बहुत ही प्रेरणादायक और दिलचस्प है, उनकी एक्टिंग भी अपने आप में किसी हकीकत से कम नहीं है. 

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Source- mj786

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Thursday, 29 September 2016

अब भगवान भरोसे भारत-पाक फिल्म उद्योग

Pakistan vs Indian film industry
भारत पाकिस्तान के बीच जिस प्रकार का द्वन्द यद्ध चल रहा है उसे देखकर लगता है पाकिस्तान पर आने वाले समय में संकट के बादल और गहरे छा जाएंगे. इसके चलते पाकिस्तान के फिल्म उद्योग को भी चिंता सताने लगी  है कि अगर भारत-पाकिस्तान संबंध और ज्यादा बदतर होते हैं और साथ ही देश में हिन्दी फिल्मों पर प्रतिबंध लग जाता है तो उसे लगभग 70 प्रतिशत नुकसान उठाना पड़ सकता है। 

साथ ही भारतीय फिल्म जगत में काम करने वालो को भी डर है कि अगर यह स्थिति बेहतर नहीं हो पाती है तो फिर आगे भारतीय फिल्मों पर प्रतिबंध लगाने की आवाज उठेगी।मशहूर जाने-माने प्रदर्शकवितरक और एट्रियम सिनेप्लेक्स सीरीज़ के मालिक नदीम मंडविवल्ला का कहना है कि 'मैं निराशावादी बातें नहीं करना चाहता हूं लेकिन सच्चाई यह है कि नई हिन्दी और अंतरराष्ट्रीय फिल्मों के प्रदर्शित होने के कारण पिछले कुछ साल में पाक के फिल्म उद्योग को एक उंचाई मिली है जो काफी सराहनीय बात है।

Bollywood actress

उन्होंने आगे यह भी बताया है कि, 'मैं केवल यह उम्मीद करता हूं कि लंबी समयावधि तक संबंधों में तनाव नहीं रहना चाहिए,यहां तक कि अगर इस उद्योग पर एक अस्थायी प्रतिबंध लगाया जाता है तो हम पर इसका खास असर नहीं पड़ेगालेकिन अगर कोई स्थायी प्रतिबंध लगता है तो ऐसी संभावना है कि ढेर सारे सिनेमा घर और मल्टीप्लेक्स बंद हो जाएंगे जिससे बेरोजगारी बढेगी।'

एक और फेमस फिल्म समीक्षक उमर अलवी ने कहा कि सिनेमा के पर्दों और टैक्स में बढ़ोतरी के कारण भी पाकिस्तानी फिल्म उद्योग का पुनरुत्थान हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि, 'कई पाकिस्तानी फिल्में प्रदर्शित हुई हैं और अच्छा काम कर रही हैं और कई अन्य प्रदर्शित होने के लिए कतार में लगी हैंलेकिन किसी सिनेमा जगत को सुचारू रूप से बने रहने के लिए एक साल में कम से कम 50 से 60 फिल्मों का निर्माण करना चाहिए जो हम इस वक्त कर पाने में असमर्थ हैं।

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Bollywood actress

उन्होंने आगे यह भी बताया है कि, 'मैं केवल यह उम्मीद करता हूं कि लंबी समयावधि तक संबंधों में तनाव नहीं रहना चाहिए,यहां तक कि अगर इस उद्योग पर एक अस्थायी प्रतिबंध लगाया जाता है तो हम पर इसका खास असर नहीं पड़ेगालेकिन अगर कोई स्थायी प्रतिबंध लगता है तो ऐसी संभावना है कि ढेर सारे सिनेमा घर और मल्टीप्लेक्स बंद हो जाएंगे जिससे बेरोजगारी बढेगी।'

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उन्होंने आगे यह भी बताया है कि, 'मैं केवल यह उम्मीद करता हूं कि लंबी समयावधि तक संबंधों में तनाव नहीं रहना चाहिए,यहां तक कि अगर इस उद्योग पर एक अस्थायी प्रतिबंध लगाया जाता है तो हम पर इसका खास असर नहीं पड़ेगालेकिन अगर कोई स्थायी प्रतिबंध लगता है तो ऐसी संभावना है कि ढेर सारे सिनेमा घर और मल्टीप्लेक्स बंद हो जाएंगे जिससे बेरोजगारी बढेगी।'

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नवरात्रि में ऐसे होगी आपकी मनोकामना पूर्ण


शारदीय नवरात्रि में देवी साधना का विशेष महत्व है, नवरात्रि में माता के नो स्वरूपों का पूजन अर्थात साधना की जाती है. नवरात्रि में देवी का प्रत्येक दिन उनके एक विशेष रूप को लेकर होता है. यदि कोई भक्त अपनी कोई इच्छा या मनोकामना से देवी के उस विशेष रूप की पूजा करता है तो वह शीघ्र ही माता की अनुकम्पा प्राप्त कर लेता है.

यदि किसी व्यक्ति का चित स्थिर नहीं है या उसके मनोबल में किसी भी प्रकार की कमी है तो वह पर्वत राज की पुत्री शैलपुत्री(माता पार्वती) की साधना करें.

यदि कोई भक्त किसी लोभ लालच  से मुक्ति चाहता हो तो वो परब्रह्म का साक्षात् कराने वाली ब्रह्मचारिणी की भक्ति करे.

यदि कोई भक्त किंचित बातों से क्रोधित हो जाता है, तनाव में रहता है तो उन्हें चंद्रघंटा माता की स्तुति करना चाहिए.

यदि भक्त बहुत मेहनत कर रहा है किन्तु परिणाम उसके अनुकुल नहीं आ रहे है तो ऐसी स्तिथि में उसे देवी कुष्मांडा की आराधना करनी चाहिए.

शिक्षा प्राप्ति के लिए, किसी प्रकार की साधना के लिए माँ स्कन्द माता की स्तुति करनी चाहिए. यदि आपका दाम्पत्य जीवन सुखपूर्वक नहीं बीत रहा है तो ऐसी स्थिति में माँ कात्यायनी की सेवा करनी चाहिए.

इसी प्रकार से महागौरी देवी का ध्यान कर सुख समृद्धि प्राप्त की जा सकती है, कालरात्रि देवी विविध प्रकार की तंत्र-मंत्र साधनाओं की सिद्धि में सहायक है.


नवीं शक्ति का नाम सिद्धि दात्री है जो मोक्ष और सिद्धि की अभिलाषा रखते है उनको सिद्धि दात्री माता की आराधना में तल्लीन रहना चाहिए.नवरात्रि के ये नो दिन भक्ति के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण और फल देने वाले है.

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शारदीय नवरात्रि में देवी साधना का विशेष महत्व है, नवरात्रि में माता के नो स्वरूपों का पूजन अर्थात साधना की जाती है. नवरात्रि में देवी का प्रत्येक दिन उनके एक विशेष रूप को लेकर होता है. यदि कोई भक्त अपनी कोई इच्छा या मनोकामना से देवी के उस विशेष रूप की पूजा करता है तो वह शीघ्र ही माता की अनुकम्पा प्राप्त कर लेता है.

यदि किसी व्यक्ति का चित स्थिर नहीं है या उसके मनोबल में किसी भी प्रकार की कमी है तो वह पर्वत राज की पुत्री शैलपुत्री(माता पार्वती) की साधना करें.

यदि कोई भक्त किसी लोभ लालच  से मुक्ति चाहता हो तो वो परब्रह्म का साक्षात् कराने वाली ब्रह्मचारिणी की भक्ति करे.

यदि कोई भक्त किंचित बातों से क्रोधित हो जाता है, तनाव में रहता है तो उन्हें चंद्रघंटा माता की स्तुति करना चाहिए.

यदि भक्त बहुत मेहनत कर रहा है किन्तु परिणाम उसके अनुकुल नहीं आ रहे है तो ऐसी स्तिथि में उसे देवी कुष्मांडा की आराधना करनी चाहिए.

शिक्षा प्राप्ति के लिए, किसी प्रकार की साधना के लिए माँ स्कन्द माता की स्तुति करनी चाहिए. यदि आपका दाम्पत्य जीवन सुखपूर्वक नहीं बीत रहा है तो ऐसी स्थिति में माँ कात्यायनी की सेवा करनी चाहिए.

इसी प्रकार से महागौरी देवी का ध्यान कर सुख समृद्धि प्राप्त की जा सकती है, कालरात्रि देवी विविध प्रकार की तंत्र-मंत्र साधनाओं की सिद्धि में सहायक है.


नवीं शक्ति का नाम सिद्धि दात्री है जो मोक्ष और सिद्धि की अभिलाषा रखते है उनको सिद्धि दात्री माता की आराधना में तल्लीन रहना चाहिए.नवरात्रि के ये नो दिन भक्ति के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण और फल देने वाले है.

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यदि किसी व्यक्ति का चित स्थिर नहीं है या उसके मनोबल में किसी भी प्रकार की कमी है तो वह पर्वत राज की पुत्री शैलपुत्री(माता पार्वती) की साधना करें.

यदि कोई भक्त किसी लोभ लालच  से मुक्ति चाहता हो तो वो परब्रह्म का साक्षात् कराने वाली ब्रह्मचारिणी की भक्ति करे.

यदि कोई भक्त किंचित बातों से क्रोधित हो जाता है, तनाव में रहता है तो उन्हें चंद्रघंटा माता की स्तुति करना चाहिए.

यदि भक्त बहुत मेहनत कर रहा है किन्तु परिणाम उसके अनुकुल नहीं आ रहे है तो ऐसी स्तिथि में उसे देवी कुष्मांडा की आराधना करनी चाहिए.

शिक्षा प्राप्ति के लिए, किसी प्रकार की साधना के लिए माँ स्कन्द माता की स्तुति करनी चाहिए. यदि आपका दाम्पत्य जीवन सुखपूर्वक नहीं बीत रहा है तो ऐसी स्थिति में माँ कात्यायनी की सेवा करनी चाहिए.

इसी प्रकार से महागौरी देवी का ध्यान कर सुख समृद्धि प्राप्त की जा सकती है, कालरात्रि देवी विविध प्रकार की तंत्र-मंत्र साधनाओं की सिद्धि में सहायक है.


नवीं शक्ति का नाम सिद्धि दात्री है जो मोक्ष और सिद्धि की अभिलाषा रखते है उनको सिद्धि दात्री माता की आराधना में तल्लीन रहना चाहिए.नवरात्रि के ये नो दिन भक्ति के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण और फल देने वाले है.

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नवरात्रि : नो माताओं का होगा अपने लालों से मिलन













देवी जगदम्बा की नो शक्तियां अर्थात नो स्वरुप है जिनके प्रथक-प्रथक नाम इस प्रकार से है:
प्रथम का नाम शैल पुत्री(जिन माता ने पारवती देवी के रूप में पर्वत राज हिमालय के घर में जन्म लिया), दूसरी शक्ति का नाम ब्रह्मचारिणी(ये वो शक्ति है जो परब्रह्म का साक्षात्कार कराती है), माता की तीसरी शक्ति का नाम चन्द्रघंटा है अर्थात जिस देवी के घंटा में चन्द्रमा स्थित है. 

इसी प्रकार माताजी की चतुर्थ शक्ति कुष्मांडा है(तीनों ताप्युक्त जगत जिनके उदर में विद्यमान है). पांचवा स्वरुप स्कन्द माता अर्थात कार्तिकेय को जन्म देने वाली है, माता के षष्टम स्वरुप देवी कात्यायनी का है(महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट होने वाली वो देवी जिनको ऋषि कात्यायन ने अपनी बेटी माना है). 

इसी प्रकार से सातवी माता का नाम काल रात्री है जो सम्पूर्ण संसार को भी नष्ट करने वाली काल की भी विनाशिका है. आठवीं शक्ति महागौरी है जिन्होंने भगवान् भोलेनाथ के महाकाली कहने पर घौर तपस्या करके वरदान में महान गौरवर्ण प्राप्त किया था. नवीं माता का नाम सिद्धिदात्री अर्थात मोक्ष प्रदान करने वाली माताजी है.
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प्रथम का नाम शैल पुत्री(जिन माता ने पारवती देवी के रूप में पर्वत राज हिमालय के घर में जन्म लिया), दूसरी शक्ति का नाम ब्रह्मचारिणी(ये वो शक्ति है जो परब्रह्म का साक्षात्कार कराती है), माता की तीसरी शक्ति का नाम चन्द्रघंटा है अर्थात जिस देवी के घंटा में चन्द्रमा स्थित है. 

इसी प्रकार माताजी की चतुर्थ शक्ति कुष्मांडा है(तीनों ताप्युक्त जगत जिनके उदर में विद्यमान है). पांचवा स्वरुप स्कन्द माता अर्थात कार्तिकेय को जन्म देने वाली है, माता के षष्टम स्वरुप देवी कात्यायनी का है(महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट होने वाली वो देवी जिनको ऋषि कात्यायन ने अपनी बेटी माना है). 

इसी प्रकार से सातवी माता का नाम काल रात्री है जो सम्पूर्ण संसार को भी नष्ट करने वाली काल की भी विनाशिका है. आठवीं शक्ति महागौरी है जिन्होंने भगवान् भोलेनाथ के महाकाली कहने पर घौर तपस्या करके वरदान में महान गौरवर्ण प्राप्त किया था. नवीं माता का नाम सिद्धिदात्री अर्थात मोक्ष प्रदान करने वाली माताजी है.
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इसी प्रकार माताजी की चतुर्थ शक्ति कुष्मांडा है(तीनों ताप्युक्त जगत जिनके उदर में विद्यमान है). पांचवा स्वरुप स्कन्द माता अर्थात कार्तिकेय को जन्म देने वाली है, माता के षष्टम स्वरुप देवी कात्यायनी का है(महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट होने वाली वो देवी जिनको ऋषि कात्यायन ने अपनी बेटी माना है). 

इसी प्रकार से सातवी माता का नाम काल रात्री है जो सम्पूर्ण संसार को भी नष्ट करने वाली काल की भी विनाशिका है. आठवीं शक्ति महागौरी है जिन्होंने भगवान् भोलेनाथ के महाकाली कहने पर घौर तपस्या करके वरदान में महान गौरवर्ण प्राप्त किया था. नवीं माता का नाम सिद्धिदात्री अर्थात मोक्ष प्रदान करने वाली माताजी है.
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Wednesday, 28 September 2016

नवरात्रि में विधि-विधान से पूजन करने के नियम



पुराणों में पूजन की पांच विधियाँ बताई गई है, पहला सफाई(अभिगमन) दूसरा उपादान(गंध पुष्प आदि पूजन सामग्री का संग्रह) तीसरा योग(अपने इष्ट देव की आत्मरूप से भावना करना) चौथा सवाध्याय(मन्त्र जप, सूक्त स्त्रोत, नाम गुण आदि का कीर्तन करना) पांचवा इज्या(इसमें षोडषोपचार अर्थात सोलह प्रकार के उपचार सम्मिलित है.

यह षोडषोपचार इस प्रकार है:

आसन
स्वागत
पाद
अर्ध्य
कलश
आचमन
मधुपर्क
स्नान
वस्त्र
आभूषण
सुगन्धित द्रव्य
पुष्प
धूप
दीप
नैवेद
वंदना.  
नवरात्रि के नो दिनों में आप जितनी भक्तिभाव से माता दुर्गा की पूजा करेंगे उतना ही माता रानी आपको सफल-सरल और सुशिल बनाएगी. इसलिए इस नवरात्रि में पूजा को बड़े ही विधि-विधान के साथ करना.

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पुराणों में पूजन की पांच विधियाँ बताई गई है, पहला सफाई(अभिगमन) दूसरा उपादान(गंध पुष्प आदि पूजन सामग्री का संग्रह) तीसरा योग(अपने इष्ट देव की आत्मरूप से भावना करना) चौथा सवाध्याय(मन्त्र जप, सूक्त स्त्रोत, नाम गुण आदि का कीर्तन करना) पांचवा इज्या(इसमें षोडषोपचार अर्थात सोलह प्रकार के उपचार सम्मिलित है.

यह षोडषोपचार इस प्रकार है:

आसन
स्वागत
पाद
अर्ध्य
कलश
आचमन
मधुपर्क
स्नान
वस्त्र
आभूषण
सुगन्धित द्रव्य
पुष्प
धूप
दीप
नैवेद
वंदना.  
नवरात्रि के नो दिनों में आप जितनी भक्तिभाव से माता दुर्गा की पूजा करेंगे उतना ही माता रानी आपको सफल-सरल और सुशिल बनाएगी. इसलिए इस नवरात्रि में पूजा को बड़े ही विधि-विधान के साथ करना.

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यह षोडषोपचार इस प्रकार है:

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आभूषण
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धूप
दीप
नैवेद
वंदना.  
नवरात्रि के नो दिनों में आप जितनी भक्तिभाव से माता दुर्गा की पूजा करेंगे उतना ही माता रानी आपको सफल-सरल और सुशिल बनाएगी. इसलिए इस नवरात्रि में पूजा को बड़े ही विधि-विधान के साथ करना.

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