FREAKY FUNTOOSH - FLAVORED ENTERTAINMENT: September 2016

Naagin 5: Surbhi के इस Naagin Dance की ख़ूब हो रही है तारीफ़!

New Delhi: कलर्स टेलीविज़न के सुपरहिट शो  'नागिन 5' (Naagin 5) में अपनी एक्टिंग से धमाल मचाने वाली एक्ट्रेस सुरभि चंदना (Surbhi Chand...

अमिताभ : इसको लगा डाला मतलब फॅमिली जिंगालाला

 
amitabh bachchan in tata sky tvc ad

बात पते की, यदि आप एंग्रीमेन मतलब बिग बी मने अमित जी के गजब के फेन है तो यह आर्टिकल आप पर कुर्बान है चूँकि रिश्ते में तो हम तुम्हारे....नाम है .....को दिलो जान से चाहते है. हमारे कुली नंबर वन फिल्म जगत में आए दिन कुछ न कुछ नया करते रहते है, उनके कर्मकांड से उनकी उम्र का पता ही नहीं चलता है.

ऐसा लगता है जैसे बच्चन साहब फिर से बचपने में चले गए है और एक नई ज़िन्दगी की शुरुआत कर रहे है, वे फिर जवान होंगे...फिर बूढ़े होंगे...और फिर दिल तो बच्चा है जी. अमितजी कभी कौन बनेगा करोड़पति के होस्ट, तो कभी नवरत्न तेल...ठंडा-ठंडा कूल-कूल में और कभी दिवार,जंजीर,अमर अकबर अन्थोनी,डॉन,अग्निपथ,ब्लैक,पा,पिकू जैसी विचित्र और चुनौतीपूर्ण फिल्मे करने के बाद आज बॉलीवुड में ही नहीं पूरी दुनिया में वे एक अलग पहचान के साथ जाने जाते है. 

जब अमिताभ बच्चन साहब बीमार होने पर हॉस्पिटल में भर्ती हुए तो पूरा देश उनके अच्छे होने की प्रार्थना करने लागा और वे शीघ्र ठीक हो गए.एंग्रीमेन का फ़िल्मी सफ़र बहुत ही प्रेरणादायक और दिलचस्प है, उनकी एक्टिंग भी अपने आप में किसी हकीकत से कम नहीं है. 

Source- mj786

हाल ही में अपने बच्चन साहब ने एक विज्ञापन किया है जो Tata sky company का है, जिसका प्रिय डायलॉग है टाटा स्काई लगा डाला तो..लाइफ जिंगा लाला...और इसी कंपनी का विज्ञापन हमारे शहंशाह ने किया है...आप भी देखे और शेयर करे और लाइफ को जिंगा लाला बनाए !

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अब भगवान भरोसे भारत-पाक फिल्म उद्योग

Pakistan vs Indian film industry
भारत पाकिस्तान के बीच जिस प्रकार का द्वन्द यद्ध चल रहा है उसे देखकर लगता है पाकिस्तान पर आने वाले समय में संकट के बादल और गहरे छा जाएंगे. इसके चलते पाकिस्तान के फिल्म उद्योग को भी चिंता सताने लगी  है कि अगर भारत-पाकिस्तान संबंध और ज्यादा बदतर होते हैं और साथ ही देश में हिन्दी फिल्मों पर प्रतिबंध लग जाता है तो उसे लगभग 70 प्रतिशत नुकसान उठाना पड़ सकता है। 

साथ ही भारतीय फिल्म जगत में काम करने वालो को भी डर है कि अगर यह स्थिति बेहतर नहीं हो पाती है तो फिर आगे भारतीय फिल्मों पर प्रतिबंध लगाने की आवाज उठेगी।मशहूर जाने-माने प्रदर्शकवितरक और एट्रियम सिनेप्लेक्स सीरीज़ के मालिक नदीम मंडविवल्ला का कहना है कि 'मैं निराशावादी बातें नहीं करना चाहता हूं लेकिन सच्चाई यह है कि नई हिन्दी और अंतरराष्ट्रीय फिल्मों के प्रदर्शित होने के कारण पिछले कुछ साल में पाक के फिल्म उद्योग को एक उंचाई मिली है जो काफी सराहनीय बात है।

Bollywood actress

उन्होंने आगे यह भी बताया है कि, 'मैं केवल यह उम्मीद करता हूं कि लंबी समयावधि तक संबंधों में तनाव नहीं रहना चाहिए,यहां तक कि अगर इस उद्योग पर एक अस्थायी प्रतिबंध लगाया जाता है तो हम पर इसका खास असर नहीं पड़ेगालेकिन अगर कोई स्थायी प्रतिबंध लगता है तो ऐसी संभावना है कि ढेर सारे सिनेमा घर और मल्टीप्लेक्स बंद हो जाएंगे जिससे बेरोजगारी बढेगी।'

एक और फेमस फिल्म समीक्षक उमर अलवी ने कहा कि सिनेमा के पर्दों और टैक्स में बढ़ोतरी के कारण भी पाकिस्तानी फिल्म उद्योग का पुनरुत्थान हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि, 'कई पाकिस्तानी फिल्में प्रदर्शित हुई हैं और अच्छा काम कर रही हैं और कई अन्य प्रदर्शित होने के लिए कतार में लगी हैंलेकिन किसी सिनेमा जगत को सुचारू रूप से बने रहने के लिए एक साल में कम से कम 50 से 60 फिल्मों का निर्माण करना चाहिए जो हम इस वक्त कर पाने में असमर्थ हैं।

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नवरात्रि में ऐसे होगी आपकी मनोकामना पूर्ण


शारदीय नवरात्रि में देवी साधना का विशेष महत्व है, नवरात्रि में माता के नो स्वरूपों का पूजन अर्थात साधना की जाती है. नवरात्रि में देवी का प्रत्येक दिन उनके एक विशेष रूप को लेकर होता है. यदि कोई भक्त अपनी कोई इच्छा या मनोकामना से देवी के उस विशेष रूप की पूजा करता है तो वह शीघ्र ही माता की अनुकम्पा प्राप्त कर लेता है.

यदि किसी व्यक्ति का चित स्थिर नहीं है या उसके मनोबल में किसी भी प्रकार की कमी है तो वह पर्वत राज की पुत्री शैलपुत्री(माता पार्वती) की साधना करें.

यदि कोई भक्त किसी लोभ लालच  से मुक्ति चाहता हो तो वो परब्रह्म का साक्षात् कराने वाली ब्रह्मचारिणी की भक्ति करे.

यदि कोई भक्त किंचित बातों से क्रोधित हो जाता है, तनाव में रहता है तो उन्हें चंद्रघंटा माता की स्तुति करना चाहिए.

यदि भक्त बहुत मेहनत कर रहा है किन्तु परिणाम उसके अनुकुल नहीं आ रहे है तो ऐसी स्तिथि में उसे देवी कुष्मांडा की आराधना करनी चाहिए.

शिक्षा प्राप्ति के लिए, किसी प्रकार की साधना के लिए माँ स्कन्द माता की स्तुति करनी चाहिए. यदि आपका दाम्पत्य जीवन सुखपूर्वक नहीं बीत रहा है तो ऐसी स्थिति में माँ कात्यायनी की सेवा करनी चाहिए.

इसी प्रकार से महागौरी देवी का ध्यान कर सुख समृद्धि प्राप्त की जा सकती है, कालरात्रि देवी विविध प्रकार की तंत्र-मंत्र साधनाओं की सिद्धि में सहायक है.


नवीं शक्ति का नाम सिद्धि दात्री है जो मोक्ष और सिद्धि की अभिलाषा रखते है उनको सिद्धि दात्री माता की आराधना में तल्लीन रहना चाहिए.नवरात्रि के ये नो दिन भक्ति के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण और फल देने वाले है.

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देवी जगदम्बा की नो शक्तियां अर्थात नो स्वरुप है जिनके प्रथक-प्रथक नाम इस प्रकार से है:
प्रथम का नाम शैल पुत्री(जिन माता ने पारवती देवी के रूप में पर्वत राज हिमालय के घर में जन्म लिया), दूसरी शक्ति का नाम ब्रह्मचारिणी(ये वो शक्ति है जो परब्रह्म का साक्षात्कार कराती है), माता की तीसरी शक्ति का नाम चन्द्रघंटा है अर्थात जिस देवी के घंटा में चन्द्रमा स्थित है. 

इसी प्रकार माताजी की चतुर्थ शक्ति कुष्मांडा है(तीनों ताप्युक्त जगत जिनके उदर में विद्यमान है). पांचवा स्वरुप स्कन्द माता अर्थात कार्तिकेय को जन्म देने वाली है, माता के षष्टम स्वरुप देवी कात्यायनी का है(महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट होने वाली वो देवी जिनको ऋषि कात्यायन ने अपनी बेटी माना है). 

इसी प्रकार से सातवी माता का नाम काल रात्री है जो सम्पूर्ण संसार को भी नष्ट करने वाली काल की भी विनाशिका है. आठवीं शक्ति महागौरी है जिन्होंने भगवान् भोलेनाथ के महाकाली कहने पर घौर तपस्या करके वरदान में महान गौरवर्ण प्राप्त किया था. नवीं माता का नाम सिद्धिदात्री अर्थात मोक्ष प्रदान करने वाली माताजी है.
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नवरात्रि में विधि-विधान से पूजन करने के नियम



पुराणों में पूजन की पांच विधियाँ बताई गई है, पहला सफाई(अभिगमन) दूसरा उपादान(गंध पुष्प आदि पूजन सामग्री का संग्रह) तीसरा योग(अपने इष्ट देव की आत्मरूप से भावना करना) चौथा सवाध्याय(मन्त्र जप, सूक्त स्त्रोत, नाम गुण आदि का कीर्तन करना) पांचवा इज्या(इसमें षोडषोपचार अर्थात सोलह प्रकार के उपचार सम्मिलित है.

यह षोडषोपचार इस प्रकार है:

आसन
स्वागत
पाद
अर्ध्य
कलश
आचमन
मधुपर्क
स्नान
वस्त्र
आभूषण
सुगन्धित द्रव्य
पुष्प
धूप
दीप
नैवेद
वंदना.  
नवरात्रि के नो दिनों में आप जितनी भक्तिभाव से माता दुर्गा की पूजा करेंगे उतना ही माता रानी आपको सफल-सरल और सुशिल बनाएगी. इसलिए इस नवरात्रि में पूजा को बड़े ही विधि-विधान के साथ करना.

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हिन्दुधर्म में क्यों मनाते है नवरात्रि


नवरात्रि महत्व: हिन्दुओं में धार्मिक उत्सवों का विशेष महत्व है जिसमे नवरात्री सबसे पहले नंबर पर आती है, हिन्दुओं में मान्यता अनुसार कई मत प्रचलित है लेकिन शायद ही कोई ऐसा परिवार होगा जहाँ नवरात्री पूजन का विधान न हो. नवरात्रि के 9 दिनों में माँ भगवती के नो रूपों की विशेष पूजा का विधान है. बहुत से लोग बस इतना ही जानते है कि नवरात्रि दो प्रकार की होती है, एक बासंती(चेत्र) नवरात्रि दूसरी शारदीय नवरात्रि. लेकिन हम धर्मशास्त्रों का अध्ययन करें तो एक वर्ष में चार नवरात्रि होती है.


चेत्र नवरात्रि : वर्ष का प्रथम मास होने के कारण इसको चेत्र मास या मधुमास भी कहा जाता है, इस समय बसंत ऋतु का आगमन भी होता है.

आषाढ़ नवरात्रि: इस नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि भी कहा जाता है, इस नवरात्रि में उग्र साधनाएं करने वाले तांत्रिक और अघोरी वीभत्स साधनाओं में लीन रहते है.

शारदीय नवरात्रि: यह नवरात्रि आश्विन शुक्ल में आती है, इसको वार्षिक नवरात्रि भी कहते है, चारों नवरात्रि में इसको ही सर्वश्रेष्ठ माना जाता है.


माघ मास की नवरात्रि: यह नवरात्रि गुप्त नवरात्रि मानी जाती है. यह गुप्त पूजन के हिसाब से अत्यंत पवित्र नवरात्रि मानी जाती है. 

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मैया मोरी तुमरे दरस की प्यासी मै

क्या आप जानते है अमित-राजीव की दोस्ती की यह सच्चाई?


दोस्त शब्द जैसी ही हम जुबाँ पर लाते है “ये दोस्ती हम तोड़ेंगे...या बने चाहे दुश्मन ये सारा ज़माना,सलामत रहे दोस्ताना हमारा” ये गाने लबों पर आते है. दोस्ती खुदा की दी हुई एक इनायत है, जो दिल के तारों से जुडी है,एक इबादत है. चोट किसी को लगती है तो, दर्द किसी को होता है. दोस्त वो हमसाया है जो हमेशा हमारे साथ चलता है. दोस्तों आज हम ऐसी ही भूली बिसरी दोस्ती की बात कर रहे है....द लीजेंड बिग बी अमिताभ बच्चन की दोस्ती. 


आप सोच रहे होंगे कि अमिताभ बच्चन का दोस्त कौन, अमरसिंह या हमारे देश के PM मोदी, जिनके गुणगान करने में वो ...”अदभुत आश्चर्य” कहते हुए कभी थकते नहीं, नहीं जनाब हम बात कर रहे है भारतीय राजनीति के महानायक राजीव गाँधी की ! कभी अमित के लंगोटिया यार रहे राजीव सातवें आसमान पर बैठकर ये गाना तो नहीं गुनगुना रहे है...”मेरे दोस्त किस्सा ये क्या हो गया, सुना है कि तू बेवफा हो गया”. 


हमारे बिग बी राजीव गाँधी के लंगोटिया यार रह चुके है.... कहा तो यह भी जाता है कि उनके पिताजी महान कवि श्री हरिवंश राय बच्चन जी के लिए शासकीय पद का सृजन भी इंदिरा और तेजी बच्चन की बेस्ट फ्रेंडशिप का ही परिणाम था, इस प्रकार देखा जाय तो गाँधी-बच्चन की फ्रेंडशिप बहुत पुरानी है....तिस मारखां लोग यह भी कहते है कि राजीव की डेशिंग और ग्रैंड पर्सनालिटी देखकर स्वर्गीय महमूद ने उनको “बॉम्बे टू गोवा” फिल्म ऑफर की थी, जिसे नेहरु-गाँधी परिवार के इस वारिस ने नम्रतापूर्वक इनकार कर दिया और अपनी जगह अमित को फिल्म साईन करने को कहा,जिससे सदी के महानायक का जन्म हुआ, शहंशाह जब कुली फिल्म में घायल हुए तो इंदिरा जी प्रधानमंत्री पद की महिमा को छोड़कर उनको मिलने हॉस्पिटल गई, पर एक बात ऐसी है जो इस दिल को धक्का पहुंचाती है, सूत्रों की माने तो इमरजेंसी के बाद जब मोरारजी शासन आया तो राजीव किसी काम से बॉम्बे आये...उन्होंने अमित से उनकी कार एयरपोर्ट पर रिसीव करने को कहा, लेकिन शासन के डर से उन्होंने अपनी कार नहीं पहुंचाई, इसमें कितना सच और कितना झूठ है ये तो उपरवाला ही जाने, लेकिन यह भी सत्य है कि 1984 में जब आयरन लेडी इंदिराजी की डेथ हुई तो उस समय राजीव के साथ अमित कंधे से कन्धा मिलाकर खड़े थे. उस समय माननीय अटलजी के सामने खुद राजीव अमित को लाए. 


सियाने लोग तो यह भी कहते है कि इस चुनावी दंगल में अटलजी जमानत भी बमुश्किल बची. इस दोस्ती में भूचाल तब आया जब हमारे एंग्री यंग मैन के ऊपर “”बोफ़ोर्स कमीशन” का दाग आया, उस समय गाँधी परिवार ने उनको कोई सपोर्ट नहीं किया,फिर हमारे बिग बी विदेशी कोर्ट से खुद की बेगुनाही का सबुत ले आये. कुछ राजनीतिज्ञ दबी जुबाँ से यह भी कहते है कि अमित ने राजीव के रिश्तों का फ़ायदा उठाकर किसी बड़े रसूखदार व्यापारी घराने को उस समय फ़ायदा दिलवाया, जिसका बड़ा कमीशन हमारे बिग बी को मिला, किन्तु वे इस बात को हमेशा ही झुठलाते रहे. अब इस फ्रेंडशिप में कौन सही कौन गलत....पर जीवन की इस ढलती सांझ में हमारे एंग्री मैन को कभी अपने चाइल्डहुड फ्रेंड की याद आएगी और क्या कभी वो सारी बाते बिसारकर अपने दिल के भीतर तहों में छिपे अपनी गहरी मित्रता को दुबारा खंगालकर, तमाम गिले-शिकवे बुलाकर अपने उस मित्र को भी ट्विटर पर एक चिट्ठी लिखेंगे? #अद्भूताश्चर्य  

फैसला आपका : देश में उन्नति या अवनति


सच्चाई छुप नहीं सकती बनावट के झूटे उसुलों से और खुशबु आ नहीं सकती कागज़ के फूलों से, अर्थ और अनर्थ में महज़ यही फ़ासला इस दौरे-जहाँ का अमिट कटु सत्य है | वर्तमान परिवेश में देश और देशवासियों का रुख किस दिशा की और है यह एक विकट प्रश्न है | 

ज्यादा गहराई में ना जाते हुए हम अपने देश की उन्नति और अवनति का विश्लेषण सतही स्तर पर करें तो पाते है कि हमारे चारों ओर सिर्फ बाबाजी का ठुल्लू ही विभिन्न प्रकार की गतिविधियों में मशरूफ है | आज देश में बलात्कार,गैंगरेप,आतंकवाद,चोरी-डकेती,लुट,सरेआम-क़त्ल,मारा-मारी,जघन्य हमले,राजनीति,कूटनीति,भ्रष्टनिति,छल-कपट,गबन,घपले-घोटाले और जाने क्या-क्या, जैसे मासूम नवजात बच्चों को पैदा करके फेंक देना या मंदिर-मस्जिद में छोड़ देना, झाड़ियों में फेंक देना, जिन्दा जमीन में गाड़ देना, चाइल्ड,गर्ल चाइल्ड, वीमेन पेट्रोलिंग, वेश्यावृत्ति,कालाबाजारी, इंसानों की खरीद-फरोक्त,फर्जीवाड़ा,माता-पिता का क़त्ल,धमकियों भरे फ़ोन कॉल्स,खुनी संघर्ष,न्याय-अन्याय के सालों चलने वाले अदालती मुकदमे,फिल्मो और टीवी प्रोग्राम्स में अश्लीलता,नए-नए धुम्रपान और नशे की नवयुवाओं में बड़ती लत या स्टाइल या फ़ेशन या कल्चर या कुछ और राम जाने क्या-क्या घटित हो रहा है ? 

कहीं महान लोगों को सम्मान और कहीं कमीने लोगों का अपमान सब कुछ इस अम्बर के निचे, कहीं हार तो कहीं जीत कहीं मैच फिक्सिंग तो कहीं लाइफ फिक्सिंग (सुपारी देना), खुनी रिश्तों में हेवानियत और वहशीपन, यह देश के हालात है या इंसान की दुर्दशा, संत-साधुओं के घिनोने कुकर्म और करोड़ों का खेल,अंधविश्वास या हकीकत राम जाने | मंदिर-मस्जिद,चर्च,गुरूद्वारे के वाद-विवाद, विविध धर्मों के साथ खिलवाड़ या धर्म ने खिलवाड़,पूरब-पश्चिम हो या उत्तर दक्षिण या हो मध्य प्रदेश हर दिशा से पीढ़ी दर पीढ़ी मानवता पर बस होती है बहस | 

मै बड़ा या तू बड़ा हर कोई जिद पर है अड़ा, कहीं,बाप बड़ा ना भय्या, सबसे बड़ा रुपय्या, कहीं मासूमों का कत्लेआम, तो कहीं नेताओं के बड्डे पार्टी में करोड़ों की धूमधाम,कोई अपने दुखों से दुखी तो कोई दूसरों के दुखों से दुखी और कोई तो दूसरों के सुखों-दुखों से सुखी-दुखी, आम,गरीब,मजबूर,दबी-कुचली जनता भूखी-भूखी और हर तरफ आज मानवता है झुकी-झुकी | कोई एक मुद्दा नहीं, अनगिनत मुद्दों से भरा पूरा जहान है | पार्लियामेंट में अफ़रातफ़री, कोई सोते हुए देश चला रहा है तो कोई देश को सुलाने में लगा हुआ है | 

Source - Anurag Shrivastav

कहीं मरीजों के अंगो की धांधली,कहीं डर्टी पॉलिटिक्स तो कहीं शिक्षा की आड़ में टीचर्स की काली करतूतें,कहीं टेक्सी ड्राइवर्स की अश्लील हरकतें, कहीं धर्म के नाम पर लुटी जा रही है इज्जतें, कैसे कमजोर-मिलावटी इमारतों तले दब कर मर रहा है इंसान, जैसे यह युग मिलावट का हो, दूध-तेल,घी,अनाज,विश्वास,प्रेम,भावना हर तरफ मिलावट खोरों का दौर है और क्या क्या हो रहा राम जाने | मुर्दे को मुक्ति नहीं मिलती,घरेलु हिंसा में पिसती जा रही नारी, क्यूँ आज नाबालिग बच्चियां झूले के बजाये फांसी के फंदे पर झूल रही है | 

पत्रकारिता में मिशन,कमीशन,मिशन-कम-कमीशन का झमेला समझ से परे है | योग्य के योग के ठिकाने नहीं और अयोग्य को शीर्ष पे बिठाकर नवाज़ा जा रहा है | यह मेरी व्यक्तिगत भावना नहीं अपितु सर्वस्व मानवजाति के लिए चिरस्मरणीय चिंता का विषय है, हम चाहते है इन सभी मुद्दों में से किसी एक मुद्दे पर ही सही आज का मानव थोड़ा गौर जरुर फरमाए,तो शायद इश्वर की बनाई इस अदभुत और अलौकिक श्रृष्टि का सही मायने में उद्देश्य पूर्ण हो जाएगा |

PM foreign travel : Heavy Handed Hunger Versus Stubborn Identity



Alike a newborn baby who does every possible and impossible attempts to complete his stubborn urge and as he grows up the dogged naughty nature too enhances until and unless he sails up to heaven or hell myth logically. Similarly, we have been eyeing since 1958 on a boy who joined RSS then BJP and who has been so called a “Tea Boy” became the Prime Minister of our Nation now by putting his enormous and effective efforts not only on the mango men but also on the Indian high society undoubtedly. 



And it could become presumable because of his strength of speech and communication power being a veteran leadership though utterance and questions are always on tongues that how can a “Tea Boy” become a duke of Indian dukedom and govern on it means not possible as per some orthodox Indian people as behaved with Congress Leader Sonia Gandhi that a foreigner can’t be the Prime Minister of India.


But the “Tea Boy” who won the battle of politics and now became a “Sky Man” and is flying very high in the sky to become a superman eventually. His back to back abroad journeys also the subject of worriment for Indian people and many a times there are gigs of gossips in public that the first Prime Minister of our country Late Jawaharlal Nehru’s clothes were sent to foreign for wash in young age and current Indian Prime Minister came to India only to change the clothes, interesting, how funny is this in Indian politics? Well, it’s their own way to live lives and perception of people. But the main concern about the “Tea Boy” who faced poverty in his childhood days very much and he served his family by making tea and even left his childhood enjoyment and dreams untouched and couldn’t play with friends and children in the playground because of serving family and responsibility.


Now what happened with this “Tea Boy”? Has he forgotten the essence of Indian bucks? Why he became so careless about his Indian poor family?  He is wasting lacks of lacks pennies on clothes and being stamped as “Suit-Boot” wali Sarkar, wandering like a “Mad Man” in abroad and sanctioning millions of Indian Rupees them. Has India become a developed country now? Did PM forget his childhood poverty and downtrodden condition of countrymen? In fact, before the parliamentary election in 2014 this “Tea Boy” visited the each and every corner of country and begged for votes by crouching before countrymen, now after winning the political game he is lost in abroad to find and build his self identity by selfie, is it the humanity? 


There is no big deal or footprints seen over the one year of kingship in politics for the welfare of country. Now countrymen are genuinely in need of that “Suit-boot” man for their betterment and development but that “Gig Boy” is busy in abroad for “dig deep in pockets” of Indian Rupees which is the blood sweating earnings of countrymen. Before elections he roared very loudly against Pakistan seas fire, black money, women’s safety, crime and corruption now what happened about those promises and funny ideas he created very seriously to fool the countrymen just for usurp the throne. He also stated to arrest Dawood Ibrahim, cleaning of Ganga River but nothing was happened. He also broke the sweet heart of sweet man Mr. Lal Krishna Advani many times, a senior leader of BJP.  Recently he said that his govt. has got success to open 15 crores bank accounts but it was purely pre decided plan to cheat Indian people saying that fifteen lakhs will be deposited in every Indian’s a/c after bringing black money in India and that is the result of fake promises and that man is totally silent on every Indian issues and problems as former Prime Minister Man Mohan Singh was.

                           Video Source .... Narendra Modi

According to media coverage, India is being recognised internationally because of Prime Minister’s visits and booming with new identity globally then what about poor and hungry Indian people (as in the words of foreigners) who are eagerly looking towards their Prime Minister for help and sustainable development. Is identity much more needed and important than the poverty of country? Big question on the head of this “journey Man” that almost became the groggy in abroad visits. He is quite busy to maintain the brotherhood with foreign countries but forgotten the fatherhood within country. He also left his family alone then how can he serve the responsibility of whole Indian family?


Video Source... Tom Says

We can say him an “Irresponsible Man” with double standard. What else mango men can do by being cheated again and again by politicians. Nowadays Indian politics became more personal than professional, nobody is caring nobody. Then who is the Maai-Baap of helpless people? But Sun rises every day, so there is a weapon so called violation of parliament and opts for Midterm election can be fruitful for Indian people and mango men can teach a simple but long-lasting lesson to “Tea Boy” 
Note - I am being a writer and Indian do not want to hurt the emotions and feelings of anyone but i want answers of those questions asked above...

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दबंग बकरा:मै आ गया हूँ OLX पर बकरा ईद मनाने


थोड़ी-सी मस्ती-
संताजी : भाई ये कैसे पता चलेगा कि सामने जो जानवर है वह बकरा है या बकरी।
बंताजी : सिंपल है मेरे भाई , उसको पत्थर मारना यदि वह भागा तो बकरा और भागी तो बकरी।

ऑनलाइन बिज़नस ने पूरी दुनिया मे धूम मचा रखी है मुस्लिम भाइयों के त्योहार बकरीद  के उपलक्ष्य में olx कंपनी प्लैटफ़ार्म पर स्मार्ट और हैंडसम बकरो की मांग जोरों से की गयी है। आपने सही सुना, स्मार्ट और हैंडसम बकरे। इस ऑफर के साथ ही लुभावने प्रलोभन भी दिए गए है। जनाब olx पर बकरों की बोली जमाझूम लगी हुई है। यहाँ हर नस्‍ल और वाजिब कीमत का बकरा olx पर मौजूद है। olx के चलते बकरीद के लिए बकरा खरीदने और बेचने के लिए आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है।

आज बकरीद मनाई जा रही है। बाजारों में बकरों की खरीद जोर-शोर से चल रही है। बकरों की हाट और बाज़ारों में भी खरीदारी हो रही है। इसके साथ ही बाजार और हाट के अलावा भी एक स्थान और है जहां बकरों को खरीदने-बेचने का काम ज़ोरों से चल रहा है। जिसका नाम है इंटरनेट आनलाइन बाजार । olx पर भी बकरों की हाट लगी हुई है। 10 हजार रुपये से लेकर डेढ़ लाख रुपये और उससे भी अधिक का बकरा olx पर बिकने के लिए उपलब्ध है।
राजस्‍थान, महाराष्‍ट्र और उत्‍तर प्रदेश की एक दर्जन से भी अधिक जानी-मानी नस्‍लों के बकरे आनलाइन बाजार मे बेचे और खरीदे जा रहे हैं। लोगों द्वारा फोन पर संपर्क कर मोल-भाव भी जारी है।
लखनऊ शहर में इस बार दुम्बा बकरा भी लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं। बकरीद का त्यौहार इस्लाम धर्म में अपने आप में बेहद खास होता है।

इस मौके पर होने वाली कुर्बानी को लेकर पूरी दुनिया में खासा उत्साह होता है। इस त्योहार पर इन बकरों को अलग अलग नामो से बेचा जा रहा हैं। जैसे खान परिवार, दबंग, सलमान और अरबाज-सोहेल, चुलबुल पांडे, सुल्तान, सोनू मोनू, चैम्पियन जैसे नामों से बेचा जा रहा है।

गुरुवार को अचानक तातारपुर बकरा हाट में गुल्फ कंट्री सऊदी अरब के दुम्बा आने से लोगों की भीड़ जुट गई. लोगों ने दुम्बें की लोगो ने खूब बोली लगाई. जगदेवपथ स्थित बकरी बाजार में एक लाख का रुस्तम नस्ल का बकरा बिक गया वहीं 1.65 लाख का सुल्तान भी है. ये दोनों दुंबा के ही नाम है. इस साल बाजार में 90 किलो और 50 किलो वजन के दुम्बे बकरे देखे गए. 

National Father-Gandhiji and Gigs of Three Monkeys


Have you ever heard about the mannerism and etiquette of monkeys since their inception? Hopefully not, though it’s been scientifically proved that monkeys were our forefather. It sounds more tangible if I say we are family members of monkeys by blood and body. 

And that is the reason behind the quote used for humanity and its honesty that was spoken by Mohandas Karamchand Gandhiji “Never See, say and hear evil” by portraying three innocent monkeys. No doubt that we came from animal genus and nowadays often called social animals but with adding words mannerism and etiquette which quite puts us in a different level, little away and advanced from monkeys. 

Here is Forth Monkey-



Those three monkeys are same constantly since then in appearance till now but they became gigs in their duties and little bit modified the quote of our national father by adding one more word and that is “Gentle Flirt” themselves. What these monkeys are doing with this quote, just they put hands on lips, ears and eyes by creating gaps amidst fingers and enjoy gentle flirt. 

Gandhiji is a father of nation and we are the national children for him undoubtedly. Nowadays most of people deleted the three words from memory and following blindly the forth one without any ponder. I am not blaming and pointing any politician, celebs, business tycoons, terrorists, religious contractors, journalists and bluff masters but you know and can understand through your pretty much better perception, here who is that? 

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Digital Marketing with uncountable bucks and benefits

           
Digital Marketing is an instant responding junction for any business service& products. Digital Marketing is a new world of technology. It is having a significant impact on how we behave socially; act as consumers and how we do business so it could be fair to say that any business that does not adapt to the new era of marketing and communications is in danger of losing out.  Digital Media Increases brand recognition. This is important because it simultaneously makes you more accessible for new customers, and makes you more interactive for existing customers. Nowadays, it’s been observed that most of the people across the globe are spending most of their time on social channels like Facebook, Twitter, LinkedIn, Pinterest, Google+ and many more.
There are many benefits of Digital Marketing, few are listed below:-

Improved brand loyalty & higher conversion rates-
“Loyalty is not a word it’s a lifestyle”. According to the latest report published by Texas Tech University, brands, which engage on social media channels, enjoy higher loyalty from their customers. Social media marketing results in higher conversion rate in a few distinct ways.

Higher Brand Authority & Improved Customer Insights-

“Faith is higher faculty than reason”. Interacting with your customers regularly showcases good faith for existing and prospective customers. When people compliment product or service, they approach to social media. And when they post your brand name, prospective customers will want to follow you for updates. Analysing your Social media marketing also gives you an opportunity to gain valuable information about what your customers are interested in and how they behave.
Cost Reduction & Simple measurement of Business:
Everyone knows that “Better has no limit”. Your business can develop its online marketing strategy for very little cost and can potentially replace costly advertising channels such as Yellow Pages, television, radio and magazine. Unlike traditional methods you can see in real time what is or is not working for your business online and you can adapt very quickly to improve your results.
Viral & Greater engagement:

Using social media promote your product/service, email and social media channels enables your message to be shared incredibly quickly, just look how effective it is for sharing breaking news. Your business can be seen anywhere in the world from your digital marketing campaign.
With digital marketing you can encourage your prospects, clients and followers to take action, visit your website, read about your products and services, explore its value proposition, buy them and provide feedback. Its best platform for instant solution of problems & issues for customers related to product & service.

Not Intrusive-

“Choice is completely yours”. We know most people hate receiving sales mail shots or phone calls at inconvenient times on stuff that they have little interest in.  Online people get the choice to opt in or out of communications and often it are relevant because they were the ones searching for it in the first place.

“If you want to understand how a lion hunts,
 Don’t go to the zoo. Go to the jungle.” 
-Jim Stengel


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