FREAKY FUNTOOSH - FLAVORED ENTERTAINMENT: February 2016

Naagin 5: Surbhi के इस Naagin Dance की ख़ूब हो रही है तारीफ़!

New Delhi: कलर्स टेलीविज़न के सुपरहिट शो  'नागिन 5' (Naagin 5) में अपनी एक्टिंग से धमाल मचाने वाली एक्ट्रेस सुरभि चंदना (Surbhi Chand...

अच्छा लगता था माँ की कोख में


आँखे खुलते मैंने ये क्या देखा---
कोई डूबा हुआ है शौक में,
कोई रो रहा है रोग में,
कोई भोंक रहा है भोग में,
कोई तड़प रहा है वियोग में,
क्यूँ गया मै इस भूलोक में ?
अच्छा लगता था माँ की कोख में |

किसी ने साथ ना दिया दुःख में,
किसी ने निवाला ना दिया मुख में,
किसी ने कुछ ना दिया भीख में,
किसी ने नि:वस्त्र छोड़ दिया धुप में,
क्यूँ गया मै इस भूलोक में ?
अच्छा लगता था माँ की कोख में |

माँ यहाँ बस दुःख-दर्द और दारु है कांख में,
माँ यहाँ हर आदमी फिरता है फ़िराक में,
माँ यहाँ बस पापी-पाखंडी रहते है साख़ में,
माँ यहाँ इमानदारी मिल जाती है ख़ाक में,
क्यूँ गया मै इस भूलोक में ?
अच्छा लगता था माँ की कोख़ में |

माँ तू ममतामय है,करुण ह्रदय है,इस जग में,
माँ तू शांति है,सहनशील है,इस वेग में,
माँ तू मर्मस्पर्शी है,पारदर्शी है,हर युग में
माँ तू सर्वस्व है,समर्पण है,हर लेख में,
क्यूँ गया मै इस भूलोक में ?
अच्छा लगता था माँ की कोख़ में ,,,,,,,,,,





मै उसकी अदाओं का आशिक,तुम कौन




तितलिओं पर सवार हो,उड़ती हुई आएगी वो,

गुलशनो से गुलों का अर्क लबों पे समेट लाएगी वो,

तड़पायेगी,तरसाएगी,और थोड़ा गुरुर में गरमाएगी वो,
चुपके से विरानो में, हल्के से कानो में शरमाएगी वो,

बहारों का बेशकीमती रंगों का लबादा लपेटे इठलाएगी वो,
वो जानती है, वो मेरी है, लेकिन फ़क़त जताएगी वो,

में आवारा हूँ,फिर भी पता परवाने का परिंदों से पूछेगी वो,
चाहे हवाओं के हालात बेकाबू हो,एक लम्हा जुदा ना रह पाएगी वो,

क़सक,तड़प,बेचैनी,जूनून,जस्बात और जवानी छलकाएगी वो,
स्त्रीलिंग है,अल्फ़ाज़ों से इज़हार नहीं कर पाएगी वो,

बस इशारों-इशारों में इश्क़े फ़रमान फरमाएगी वो,
बशर्ते "अज्ञात" ही आगाज़े बयाँ करे यही चाहेगी वो,
और मेरे खोखले ख्यालों से फिर “कविता” बन जाएगी वो...





ये साली ज़िन्दगी


खुदी से एक जंग का ऐलानहै ज़िन्दगी,
 कदम दर कदम एक इम्तहानहै ज़िन्दगी.
चिलमन से बाहर झांकोतो जहानहै जिंदगी,                                                      
 चार दिवारी में तन्हा शमशानहै ज़िन्दगी.
कभी भरी महफ़िल में सुनसान है ज़िन्दगी,                                                        
और कभी विरानो में जश्नों-जान है ज़िन्दगी.
किसी से फ़कत उम्मीदोंका अरमानहै ज़िन्दगी,                                                   
तो किसीसे फ़कतरुसवाई का फ़रमान है जिन्दगी.
कहीं चिरागोंके ग़र्दिशमें शशि-सी शान है ज़िन्दगी,                                              
तो कहींपलकों पे करवट लेतीख़्वाबों की खान है ज़िन्दगी.
रब का एक अनौखाऔर अतुल्यवरदान है ज़िन्दगी,                                             
जो भी है,जैसी भी हैमेरी पहचान है ज़िन्दगी....







        


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