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Wednesday, 29 February 2012

तू जिंदगी ना सही,तेरा एहसास हमेशा साथ रहेगा !

देखो फिर आँखोंमें नमी-सीछा गई है,

वो सूरत जोआँखों से ओझलहुई नहीं कभी,

वो यादें जो ख्यालोंसे दूर गईनहीं कभी,

आज वो चुपकेसे फिर ख़्वाबोंमें गईहै,

खुदा जो चाहा मैंनेवही तुने मुझकोदिया,

जिसमे तुझको देखा मैंनेवही तुने छीनलिया,

शिकायत नहीं तुझसेये इल्तजा रहगई है,

जैसे जिन्दगी जहां अबथमी-सी रहगई है,

बस जिन्दगी में उसकीकमी-सी रहगई है,,,,,,,,Pancho

तू जिंदगी ना सही,तेरा एहसास हमेशा साथ रहेगा !

देखो फिर आँखोंमें नमी-सीछा गई है,

वो सूरत जोआँखों से ओझलहुई नहीं कभी,

वो यादें जो ख्यालोंसे दूर गईनहीं कभी,

आज वो चुपकेसे फिर ख़्वाबोंमें गईहै,

खुदा जो चाहा मैंनेवही तुने मुझकोदिया,

जिसमे तुझको देखा मैंनेवही तुने छीनलिया,

शिकायत नहीं तुझसेये इल्तजा रहगई है,

जैसे जिन्दगी जहां अबथमी-सी रहगई है,

बस जिन्दगी में उसकीकमी-सी रहगई है,,,,,,,,Pancho

तू जिंदगी ना सही,तेरा एहसास हमेशा साथ रहेगा !

देखो फिर आँखोंमें नमी-सीछा गई है,

वो सूरत जोआँखों से ओझलहुई नहीं कभी,

वो यादें जो ख्यालोंसे दूर गईनहीं कभी,

आज वो चुपकेसे फिर ख़्वाबोंमें गईहै,

खुदा जो चाहा मैंनेवही तुने मुझकोदिया,

जिसमे तुझको देखा मैंनेवही तुने छीनलिया,

शिकायत नहीं तुझसेये इल्तजा रहगई है,

जैसे जिन्दगी जहां अबथमी-सी रहगई है,

बस जिन्दगी में उसकीकमी-सी रहगई है,,,,,,,,Pancho

तू जिंदगी ना सही,तेरा एहसास हमेशा साथ रहेगा !

देखो फिर आँखोंमें नमी-सीछा गई है,

वो सूरत जोआँखों से ओझलहुई नहीं कभी,

वो यादें जो ख्यालोंसे दूर गईनहीं कभी,

आज वो चुपकेसे फिर ख़्वाबोंमें गईहै,

खुदा जो चाहा मैंनेवही तुने मुझकोदिया,

जिसमे तुझको देखा मैंनेवही तुने छीनलिया,

शिकायत नहीं तुझसेये इल्तजा रहगई है,

जैसे जिन्दगी जहां अबथमी-सी रहगई है,

बस जिन्दगी में उसकीकमी-सी रहगई है,,,,,,,,Pancho

तू जिंदगी ना सही,तेरा एहसास हमेशा साथ रहेगा !

देखो फिर आँखोंमें नमी-सीछा गई है,

वो सूरत जोआँखों से ओझलहुई नहीं कभी,

वो यादें जो ख्यालोंसे दूर गईनहीं कभी,

आज वो चुपकेसे फिर ख़्वाबोंमें गईहै,

खुदा जो चाहा मैंनेवही तुने मुझकोदिया,

जिसमे तुझको देखा मैंनेवही तुने छीनलिया,

शिकायत नहीं तुझसेये इल्तजा रहगई है,

जैसे जिन्दगी जहां अबथमी-सी रहगई है,

बस जिन्दगी में उसकीकमी-सी रहगई है,,,,,,,,Pancho

काश ! की मेरे सिने में भी दिल होता...


काश, की मेरे सिने में भी दिल होता,
मेरे ना सही, किसी और के सिने में धड़कता,
उसके एहसासों का मनचला मंज़र,
यूँ मेरी साँसों की लहरों से गुजरता,
वो आंहें भरती तन्हाई में और
मुझे उसकी महफ़िल का खुमार होता,
काश, की मेरे सिने में भी दिल होता...!

वो सोती मेरे ख्यालों की सेज पर,
उसके ख्वाबों का कारवाँ मेरी आँखों में होता,
काली-काली घनेरी घनघोर रातों में,
प्यार भरी रोशनी से रोशन सिलसिला होता,
काश, की मेरे सिने में भी दिल होता...! 

काश ! की मेरे सिने में भी दिल होता...


काश, की मेरे सिने में भी दिल होता,
मेरे ना सही, किसी और के सिने में धड़कता,
उसके एहसासों का मनचला मंज़र,
यूँ मेरी साँसों की लहरों से गुजरता,
वो आंहें भरती तन्हाई में और
मुझे उसकी महफ़िल का खुमार होता,
काश, की मेरे सिने में भी दिल होता...!

वो सोती मेरे ख्यालों की सेज पर,
उसके ख्वाबों का कारवाँ मेरी आँखों में होता,
काली-काली घनेरी घनघोर रातों में,
प्यार भरी रोशनी से रोशन सिलसिला होता,
काश, की मेरे सिने में भी दिल होता...! 

काश ! की मेरे सिने में भी दिल होता...


काश, की मेरे सिने में भी दिल होता,
मेरे ना सही, किसी और के सिने में धड़कता,
उसके एहसासों का मनचला मंज़र,
यूँ मेरी साँसों की लहरों से गुजरता,
वो आंहें भरती तन्हाई में और
मुझे उसकी महफ़िल का खुमार होता,
काश, की मेरे सिने में भी दिल होता...!

वो सोती मेरे ख्यालों की सेज पर,
उसके ख्वाबों का कारवाँ मेरी आँखों में होता,
काली-काली घनेरी घनघोर रातों में,
प्यार भरी रोशनी से रोशन सिलसिला होता,
काश, की मेरे सिने में भी दिल होता...! 

काश,मेरे सिने में भी दिल होता पारो


काश, की मेरे सिने में भी दिल होता,
मेरे ना सही, किसी और के सिने में धड़कता,
उसके एहसासों का मनचला मंज़र,
यूँ मेरी साँसों की लहरों से गुजरता,
वो आंहें भरती तन्हाई में और
मुझे उसकी महफ़िल का खुमार होता,
काश, की मेरे सिने में भी दिल होता...!

वो सोती मेरे ख्यालों की सेज पर,
उसके ख्वाबों का कारवाँ मेरी आँखों में होता,
काली-काली घनेरी घनघोर रातों में,
प्यार भरी रोशनी से रोशन सिलसिला होता,
काश, की मेरे सिने में भी दिल होता...! 

काश,मेरे सिने में भी दिल होता पारो


काश, की मेरे सिने में भी दिल होता,
मेरे ना सही, किसी और के सिने में धड़कता,
उसके एहसासों का मनचला मंज़र,
यूँ मेरी साँसों की लहरों से गुजरता,
वो आंहें भरती तन्हाई में और
मुझे उसकी महफ़िल का खुमार होता,
काश, की मेरे सिने में भी दिल होता...!

वो सोती मेरे ख्यालों की सेज पर,
उसके ख्वाबों का कारवाँ मेरी आँखों में होता,
काली-काली घनेरी घनघोर रातों में,
प्यार भरी रोशनी से रोशन सिलसिला होता,
काश, की मेरे सिने में भी दिल होता...!