भक्तों आज यहाँ मिलेंगे संकटमोचन हनुमान, शीघ्र जाएं

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हनुमान इस ब्रह्माण्ड में सबसे ज्यादा बलशाली है, लेकिन वे उतने ही शांत स्वाभाव और कृपा बरसाने वाले भी है. इस कलियुग में हनुमान की भक्ति ही लोगों को दुख और संकट से बचाने में सार्थक हैं. कई लोग प्रायः किसी बाबा, देवी-देवता, ज्योतिष और तांत्रिकों के चक्कर काटते रहते हैं, चूँकि वे हनुमान की भक्ति-शक्ति से अनभिग्य है. कहाँ मिलेंगे भगवान हनुमान?

 

आपको यदि वास्तव में भगवान् हनुमान से मिलना है तो कहीं जाने की जरुरत नहीं है. उनके दर्शन के लिए आपको इस मन्त्र को समझ लेना चाहिए. ”यत्र-यत्र रघुनाथ कीर्तन तत्र कृत मस्तकान्जलि। वाष्प वारि परिपूर्ण लोचनं मारुतिं नमत राक्षसान्तक॥” इसका मतलब है कलियुग में जहां-जहां भगवान श्रीराम की कथा-कीर्तन इत्यादि होते हैं, वहां हनुमानजी गुप्त रूप से विराजमान रहते हैं. सीताजी के वचनों के अनुसार अजर-अमर गुन निधि सुत होऊ।। करहु बहुत रघुनायक छोऊ॥ यदि मानव पूरी श्रद्घा और विश्वास से इनका आश्रय ग्रहण कर लें तो फिर तुलसीदासजी की भांति उसे भी हनुमान और राम-दर्शन होने में ज्यादा देर नहीं लगती है.

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संकटमोचन हनुमान, श्री राम कथा-कीर्तन

 

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बता दे कि 16वीं सदी के महान संत कवि तुलसीदासजी को हनुमानजी की कृपा से ही रामजी के दर्शन हुए थे. एक कथा है कि हनुमानजी ने तुलसीदासजी से कहा था कि राम और लक्ष्मण चित्रकूट नियमित आते रहते हैं. मैं वृक्ष पर तोता बनकर बैठा रहूंगा, जब राम और लक्ष्मण आएंगे मैं आपको इशारा कर दूंगा. हनुमानजी की आज्ञा के अनुसार तुलसीदासजी चित्रकूट घाट पर बैठ गए और सभी आने-जाने वाले भक्तों को चंदन लगाने लगे. राम और लक्ष्मण जब आए तो हनुमानजी गाने लगे ‘चित्रकूट के घाट पै, भई संतन के भीर। तुलसीदास चंदन घिसै, तिलक देत रघुबीर।।’ भगवान् हनुमान के यह वचन सुनते ही तुलसीदास प्रभु राम और लक्ष्मण को निहारने लगे।’ इस प्रकार तुलसीदासजी को रामजी के दर्शन हुए.

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हनुमानजी को लेकर कई प्रकार की कहानियाँ और लेख पढ़ने को मिलते है, जिनमे उनके जीवित होने के प्रमाण भी मिलते है. कहते है हनुमानजी कलियुग में गंधमादन पर्वत पर निवास करते हैं, ऐसा श्रीमद भागवत में वर्णन आता है. भारतीय हिन्दू मान्यताओं के अनुसार माना जाता है कि यहां के विशालकाय पर्वतमाला और वन क्षेत्र में देवता रमण करते हैं. पर्वतों में श्रेष्ठ इस पर्वत पर कश्यप ऋषि ने भी तपस्या की थी. इसलिए आपको ज्यादा से ज्यादा प्रभु राम की कथाओं और कीर्तन में जाना चाहिए और उनकी स्तुति करना चाहिए. पता नहीं किस पल आपको भगवान् हनुमान के दर्शन हो जाए. “जय श्री राम”Ha

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