फिल्म रिव्यु : गंभीर मुद्दे पर व्यंग का प्रहार है टॉयलेट एक प्रेमकथा

फिल्म रिव्यु : गंभीर मुद्दे पर व्यंग का प्रहार है टॉयलेट एक प्रेमकथाफिल्म रिव्यु : गंभीर मुद्दे पर व्यंग का प्रहार है टॉयलेट एक प्रेमकथा


आज बॉलीवुड के खिलाडी अक्षय कुमार और भूमि पेड्नेकर स्टारर फिल्म टॉयलेट के प्रेमकथा रिलीज हो गई है. फिल्म में के निर्मता है नीरज पांडे जो अक्षय के साथ कई साईं फिल्मो का निर्माण कर चुके है. वही इस फिल्म का निर्देशन किया है श्री नारायण सिंह ने. यह श्री नारायण सिंह की डेब्यू फिल्म है.

जो काफी  सटीक ढंग से बनाई गई है. आज तक कई अलग अलग विषय पर फिल्म बन चुकी है, जिनमे स्मोकिंग, केंसर, स्पर्म और मानव तस्करी से जुडी फिल्मे शामिल है लेकिन पहली बार टॉयलेट जैसे मुद्दे पर फिल्म का निर्माण किया गया है जो कि काबिले तारीफ़ है.

फिल्म रिव्यु : गंभीर मुद्दे पर व्यंग का प्रहार है टॉयलेट एक प्रेमकथा

फिल्म रिव्यु : गंभीर मुद्दे पर व्यंग का प्रहार है टॉयलेट एक प्रेमकथा

कहानी – अगर बात करे फिल्म की कहानी कि तो फिल्म  पंडित परिवार में जन्‍मे केशव के इर्द गिर्द घुमित है. केशव मांगलिक है और गाँव में रहता  है, उसकी एक साइकल  की दूकान है. उम्र निकली जा रही है पर केशव की शादी नहीं हो रही है. फिर केशव को टॉपर भूमि पेड्नेकर से प्यार हो जाता है फिर वो उसे पटाने और शादी केलिए मानाने में लग जाता है, जैसे तेसे केशव की शादी होती है.

लेकिन शादी के बाद में शुरु हो जाता है बखेड़ा. कैशव् की बीवी उससे घर में शौचालय बनवाने की बात कहती है. और केशव के पिता इस बात से इनकार करते है. एक पंडित के घर में शौचालय के साथ साथ गाँव में शौचालय केसे बना  सकते है के मुद्दे तक कहानी पहुँच जाती है. फिर केशव लग जाता  घर में शौचालय बनवाने के मिशन में. आखिर क्या केशव अपनी बीवी को मना पायेगा, क्या घर में  शौचालय बन पायेगा इसके लिए आपको सिनेमा घर का रुख करना होगा.



अभिनय और निर्देशन – फिल्म में अक्षय कुमार के साथ में भूमि पेड्नेकर, दिव्येंदु , सुधीर मिश्रा और अनुपम खेर  मुख्य भूमिका में है. सभी कलाकारोंने अपने अभिनय से दिल खुश किया है. जहाँ अक्षय और भूमि पूरी तरह से देशी अंदाज में अपने अभिनय से प्रभावित करते है. वही सुधीर और अनुपम भी अपने अभिनय से  दिल जित लेते है. वही अपनी पहली फिल्म के साथ में   श्री नारायण सिंह काफी बेहतरीन लगे है उनका निर्देशन काफी सटीकसा लगता है.साथ ही उनके भविष्य में वे और भी बेहतर निर्देशक बन सकते है.



क्या है खास – फिल्म शौचालय जैसे एक गंभीर मुद्दे पर आधारित है जो कि न केवल एक गाँव की स्थिति को दर्शाती है साथ ही साथ में तत्कालीन सरकार के कामो को भी बताती है. फिल्म में एक साथ में की सारे मुद्दों पर रौशनी डाली गई है, शानदार अभिनय शानदार कहानी फिल्म को और भी दिलचस्प बनाते है. फिल्म समाज का एक आइना है. अगर आप अच्छी कहानी, अच्छा अभिनय और दमदार पंचलाइन से सजी फिल्म देखना चाहते है तो यह फिल्म आपके लिए ही है. हम इस फिल्म को 4 स्टार देंगे.

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