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करवाचौथ पर सुहागनें टुटा बताशा न खाएं, पति…

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 करवा चौथ इस बार रविवार को मनाया जा रहा है. यह पर्व होता तो सुहागनों का है, लेकिन लम्बी आयु की कामना पति के लिए की जाती है. इस दिन शादीशुदा महिलाएं व्रत रखती है, और करवा माता से अपने पति की लम्बी उम्र का वरदान मांगती है. सुहागनें इस दिन भूखे रहती है और रात को चांद और अपने पति का चेहरा देखने के बाद ही व्रत खोलती हैं. सुहागनों के लिए करवा चौथ की पूजा में चंद्रमा का बहुत ही महत्व होता है. चंद्रमा की पूजा करने के बाद ही सुहागन औरतें अपने पतियों का चेहरा देखकर उनके हाथ से व्रत खोलती है.

 

क्यों की जाती है चन्द्रमा की पूजा-

 

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करवा चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा करने का विशेष महत्व माना गया है. चंद्रमा को शीतलता और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है और इससे मिलने वाली मानसिक शांति से रिश्ते बहुत मजबूत होते हैं. एक खास बात और देखने में आई है कि ज्यादातर लोगों को मोक्ष चंद्रमा वाले दिन यानी पूर्णिमा वाले दिन ही प्राप्त हुआ है. जैसे समुद्र को चंद्रमा रेगुलेट करता है वैसे ही हमारे मन को भी चंद्रमा चलाता है. कहते है चंद्रमा को लंबी आयु का वरदान प्राप्त है, और चांद के पास  प्रेम और प्रसिद्धि असीमित है. यही कारण है कि सुहागिन औरतें चंद्रमा की पूजा करती हैं. जिससे ये सारे गुण उनके पति में भी आ जाए, और उनकी शादीशुदा जिन्दगी में शांति और प्रेम हो.

 

प्रेम का प्रतीक है चंद्रमा

 

चंद्रमा की शीतल चांदनी पति-पत्नी के बीच प्रेम को बढ़ाने का काम करती है. रिश्तों में शांति और शीतलता लाती है. और इसी कारण चंद्रमा को रोमांस का पर्याय भी माना गया है.

 

क्यों खाना चाहिए पूरा बताशा –

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सुहागन महिलाएं दिन भर बिना खाना खाए और बिना पानी पिए रहती है. जब व्रत खोलने का समय होता है, तब सुहागनों को पूरा बताशा खाना चाहिए, आधा या टूटा बताशा नहीं खाना चाहिए, क्योंकि पूरा बताशा पूर्ण है और चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है और रिश्ते को भी पूर्ण बनाता है. कभी भी बताशा आधा खाकर एक-दूसरे को ना खिलाएं, बल्कि पूरा बताशा अकेले खाएं. इससे आपके अंदर पूर्णता आएगी, और जब आप अंदर से पूर्ण होते हैं तभी दूसरे को प्यार दे पाते हैं. इसलिए महिलाओं को करवा चौथ पर इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए.

 

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